समाप्त – सौरभ पाण्डेय
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जिंदगी का एक शब्द है समाप्त इस संसार में कोई प्राणी है कोई भी बड़ा सा बड़ा जीव उसकी जीवन की समाप्ति का एक दिन निश्चित अगर जीवन का कोई भी अध्याय हम शुरुआत करते हैं, तो उसे अध्याय का एक दिन समाप्त होने का दिन निश्चित है l चाहे वह अध्याय चाहे जितना बड़ा हो चाहे जितने दिन लगे,चाहे जितने समय लगे,चाहे जितने सेकंड हो,बस हमें यह पता होना चाहिए कि हमारे जीवन का मूलभूत उद्देश्य क्या है l बचपन के दिनों को याद किया जाए तो उन दिनों में हमारा कोई मूलभूत उद्देश्य नहीं रहता क्योंकि हम किसी के अधीन रहते हैं उसी के बताए हो रास्तों को अनुसरण करते हैं लेकिन जैसे हमारी उम्र बढ़ती रहती है सोचने और समझने की क्षमता भी बढ़ती रहती है कि हमारी जिंदगी का मूलभूत उद्देश्य क्या है हम आने वाले समय में अपने प्रथम अध्याय को कैसे शुरुआत करें जीवन का एक लक्ष्य यह भी रहता है शुरुआत हुई अध्याय को एक दिन समाप्ति की ओर भी हमें ले जाना पड़ता है कुछ को बीच में ही रोक दिया जाता है और कुछ लंबे समय तक चलते रहते हैं एक चीज विचार किया जाए क्या हमारे जीवन की मूलभूत आवश्यकता है जो हैं क्या यह भविष्य में कभी समाप्त होगी, हमारे अंदर जो गंदगी है, जो द्वेष है,जो गुस्सा है क्या यह कभी समाप्त होगा मैं कह सकता हूं शायद नहीं जिंदगी के इस अध्याय को कभी भी समाप्ति की ओर नहीं जा सकता क्योंकि हमारा मन हर प्रकार की कपट से भरा हुआ है यह कभी समाप्त नहीं हो सकता एक दिन हम मिट्टी में भले मिल जाए लेकिन जिंदगी दौड़ में इस प्रकार की भोग विलास की वस्तुएं चलती रहेगी जाते-जाते हम भले अपने को देते जाएं लेकिन जिंदगी का यह अध्याय कभी समाप्त नहीं होगा l बस चलता जाएगा चलता जाएगा लिए
सौरभ पाण्डेय (उत्तर प्रदेश)
