साहित्य

महंगाई की मार – गणपत लाल उदय

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महंगाई की मार – गणपत लाल उदय
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महंगाई की मार का शायद अब बज चुका है अलार्म,
विदेशी यात्रा पर रोक लगाओ अब कर दो यह कम।
सूत्रों की माने तो रोजमर्रा चींजों पर भी होगा असर,
सोना-चांदी, डीजल-पेट्रोल का उछाल देख रहें हम।।
हो सकती है बढ़ोतरी अब खाद्य-सामग्रियों के अंदर,
ये फिजुल ख़र्चा कम करो अब घूमें नही इधर उधर।
बैंक ब्याज दर पर भी पड़ सकता है इसका ये असर,
ईरान युद्ध प्रमुख कारण है जो पार है सात समन्दर।।
ना लड़ना, ना कोई झगड़ना दिन अपने ये काट लेना,
लगेगा झटका मध्यम वर्ग को है सबका ऐसा कहना।
अब प्राकृतिक गैस मे भी आ सकता भरकम उछाल,
किराया बढ़ेगा ऑटो-टैक्सी का यह कष्ट भी सहना।।
सहना है मिलकर के सबको महंगाई वाली अब मार,
इसी का नाम है ज़िंदगी कोई इससे नही जाना हार।
चलते जाना है आशा लिए कभी तो आएगी ये बहार,
जंग तपिश से जल रहा है आज सम्पूर्ण यह संसार।।
अर्थशास्त्रियों ने चेताया अतिशीघ्र होगा यह बदलाव,
तले-भुने पदार्थों को कम कर बदले अपना स्वभाव।
न लेना कोई इसे हल्के में न समझे शासन का दबाव,
सारासच लिखा है हमने इस कविता में अपने भाव।।
सैनिक की कलम

गणपत लाल उदय अजमेर राजस्थान

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