
ना भुख लगे – हेमलता ओझा
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ना भुख लगे ना प्यास लगे
ना नींद ही आये आंखों में
जब तुम चैन से सोते हो
हम आंस लगाये बैठे हैं
कोइ छु सके ना सरहद को
अपने नापाक इरादों से
हम गोली भरकर बैठे हैं
हम सीनाताने बैठे है
जब तुम
ना आधीका ग़म हमको है
तुफां भी ना हिला सकता है
ये फौलादी इरादे हैं
जो बर्फ पर भी सो सकता है
तुम दिये जलाते हो रातों को
हम सरहद पर जुगनू बन जाते हैं
गुलशन हो मांका आंचल
हम रातों को भी जग जाते हैं
नही पता हमको है
ये जीवन कितने दिन का है
नही पता हम सबको है
कब आये कहां से गोली
हम मौत लपेटे बैठे है
हर पल हर क्षण तत्पर रहते
मां की रखवाली को
रहे सलामत हिंद मेरा
लहराता रहे तिरंगा मेरा
नमनभारत देश को है
बस आरज़ू एक हम सबकी है
जब जब भी जन्म मिले
बस प्रहरी मां का बन जाये
हर जनम कुर्बान करके जीवन धन्य बना जाये
कैसे कोइ कर पाता है
त्याग हंसते हंसते
जीवन देकर भी
दे जाते हैं आंसू हम सबको
धन्य लाल तु धन्य है
है सलाम देश करता है
तू तो फौजी हो
बस तु ही ये कर सकता है
सलाम वन मैन आर्मी को जयहिंद
हेमलता ओझा
उत्तर प्रदेश
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