खुशियाँ – मंजुला शरण “मनु”

खुशियाँ – मंजुला शरण “मनु”
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“खुशी ” सिर्फ़ दो अक्षरों का एक शब्द मात्र नहीं है। बल्कि खुशी जीवन की वह अनुभूति है, जो सभी जीव के लिए ऐसी अनुभूति है,जिसका सीधा संबंध किसी विशेष भावनात्मक अवस्था से है।
मनुष्य और पशु-पक्षी,वनस्पति सभी में चेतना होती है। चूंकि मनुष्य सब जीवों में सब से अधिक चैतन्य जीव है, अतः उसकी खुशियों की अनुभूतियाँ अनेक प्रकार की होती हैं।
मनुष्य से इतर पशु पक्षी और वनस्पति आदि की खुशियाँ केवल आहार, सकारात्मक वातावरण और परिस्थितियों तक ही सीमित हैं। किन्तु, मनुष्य की खुशियों के अनेक आयाम और स्तर बँटे हुए हैं, उसी प्रकार उसकी खुशियों के स्तर का फ्रेम भी छोटा और बड़ा होता है।
एक दिहाड़ी मजदूर की खुशी उसकी शाम को मिलने वाली एक दिन की कमाई है। वैसे ही किसी बड़े राजनेता, अभिनेता, शिक्षाविद, छात्र, कलाकार, और वैज्ञानिक की खुशी उसका टारगेट है।
एक गृहणी की खुशी उसके व्यवस्थित घर और पारिवारिक दायित्वों की पूर्णता है।
अमूमन सभी के दिन की शुरुआत एक कप चाय के साथ शुरू होती है, जो उसके स्तर और उसके प्याले से उसे सुकून के साथ एक अनकही खुशी देती है।
दैनिक खुशियों के साथ मनुष्य की खुशियाँ पारंपरिक त्यौहारों, उत्सवों,अनुष्ठानों, सामाजिक और पारिवारिक शादी-ब्याह, जन्मोत्सव, जन्मदिन जैसे उपलक्ष्य अपनों के साथ साझा करके खुशी पाना। मनोनुकूल उपलब्धियाँ, सुखद यात्रा ,दर्शनींय स्थलों की सैर, मधुर संगीत, उपहार-सम्मान, प्रशंसा, प्रतीक्षित वस्तु या व्यक्ति से मिलना खुशी है। मतलब वह जिसके मिलने से मन सुखी हो।
मंजुला शरण “मनु”
राँची, झारखण्ड़।
