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देश – कमल धमीजा

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देश – कमल धमीजा
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जीने के बहाने यहाँ ,मौसम सुहाने यहाँ
छोड़ अपने देश को, कहीं मत जाइए।
माटी की सुगंध जहाँ, ऐसी है महक कहां
चूमकर धरती को, तिलक लगाइए।
भाषाओं के कई रंग,  घूमते हैं संग- संग
प्यारे भारत देश का,  सम्मान बढ़ाइए।
भारत महान है ये, मेरी पहचान है ये
जाके पूरे जगत को, शान से बताइए।
सुन्दर हमारा देश, किस बात पर क्लेश ।
थोड़ा अपनी सोच को, ऊपर उठाइए।
अंग्रेजों को छोड़ो अब,खुद को जोड़ोगे कब।
दुनियाँ के आगे मत, खुद को हॅंसाइए।
जात पात रूप रंग, कैसी है ये सोच तंग ।
नफ़रती इंसानों की ,बातों में न आइए।
अपना भारत प्यारा उच्च, मजबूत भाईचारा।
स्वतंत्रता दिवस है,  झंडा फहराइए।
स्वरचित मौलिक अधिकार रचना
कमल धमीजा
फरीदाबाद- हरियाणा

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